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*जीवन* *अनमोल* *है*

*जीवन* *अनमोल* *है* सुख-दुःख तो जीवन के साथी है। जीवन एक दीया तो एक बाती है।। हम तुम तो जन्मों जन्म के साथी है। फिर किस बात की ये दूरी है किस बात की नज़दीकी है।। ये कुदरत का नज़राना है। कहाँ किसी का आना है कहाँ किसी का जाना है।। बस जीवन मृत्यु का बहाना है। एक दिन यहाँ सभी को छोड़ के जाना है।। जब तक दुनिया मे जीना है। तब तक जहर और अमृत एक समान पीना है।। सुख-दुःख तो जीवन के साथी है। एक का आना तो एक का जाना है।। हार जीत तो मुक़द्दर का खेल है। कोई जीत कर भी हार जाता है।। कोई हार कर भी जीत जाता है। मिलता उसी को जो सब कुच्छ सह जाता है।। जिसने जीवन मृत्यु का खेल रचा है। वो विधाता ऊपर बैठे सबको देख रहा है।। शिक्षा दी उसने इंसानों को जिस कर्म की। इंसानों ने अपना कर्म धर्म अपने हाथों से अगल कर चुका है।। एक दिन दुनिया को छोड़ जाना है। फिर किस बात का घमंड दिखाना है।। रह जाएगा सब कुछ यहीं पे करनी धरनी। फिर किस बात को आगे ले जाना है।। जाएगा कर्म धर्म सिर्फ साथ मे। और क्या ले जाना इस संसार से।। खाली हाथ आये थे खाली हाथ जाना है। फिर क्यों छः फुट कफ़न के लिए आपस मे लड़ के ...

क्या लिखूं कुच्छ लिखनें का मन नहीं करता।

क्या लिखूं कुच्छ लिखनें का मन नहीं करता। याद है वो सब पुरानी यादें बस समेटने का मन नहीं करता।। कैसे भूल जाऊं उन्हें जिनने हर बार धोके दिए हैं। बस उन्हें सजा देना का मन नहीं करता।। खुद ही जहर पी लेता हूँ जिन्दगी के। अब किसी से कहने का मन नहीं करता।। इस साल की आखरी कविता लिख रहा हूँ। अब आगे लिखनें का मन नहीं करता।। -----*----*---*--*-* मेरी थोड़ी बहुत कविताएँ ब्लोगस्पोट पर मिल जाएंगी- http://manoj-armaan.blogspot.in/?m=0 धन्यवाद सभी मित्रों का जिन्होंने मेरी कविताएँ पसंद की.        ""मनोज कुमाउनी""

प्यार की बातें

ज़िन्दगी पैसों की मोहताज़ हो गयी है। आधुनिक चीजों मैं बदल गयी है।। कौन करता है अब प्यार की बातें। कहा होती है अब श्री राधेकृष्ण की जैसी मुलाकाते।। मोहमाया मैं खो गया है। ये जग सो गया है।। अब कौन मित्रता निभाता है। अब कहा श्री कृष्ण सुदमा के जैसा कौन किसे गले लगता है।। कौन धोता है अब आंशुओं से पैरों कों। मैंने तो दिल मैं खंजर डालते हुए देखा है अब ज़िन्दगी बदल चुकी है। भवसागर मैं खो चुकी है।। वक़्त और हलात के आगे। मैंने झुकते हुए देखा है।। बँधे हुए बाँध को मैंने। एक पल मैं टूटते हुए देखा है।। ""अब कहां होती है प्यार की बातें" ""कहां होती है अब श्री राधेकृष्ण की मुलकतें"" बड़े बड़े वादे करने वालों को। मैंने मुकरते हुए देखा है।। पल भर मैं मैंने ये ज़िन्दगी।  बदलते हुए देखा है।। दिल से सजाये हुए रिश्तों को। पल भर मैं बिखरतें हुए देखा है।। ""ज़िन्दगी आधुनिक हो गयी है"" अब कहां होती है प्यार मैं वो बातें। मैंने तो लहरों को किनारों से मिलते हुए देखा है।। अब जिंदगी बदल चुकी है। भवसागर मैं खो चुकी है।। अब कहा होती है प्...

""प्रकृति से हो रही छेड़खानी पर ये कविता""

""प्रकृति से हो रही छेड़खानी पर ये कविता"" आज ये कविता लिख कर। दिल मेरा रो पड़ा है।। हो रही ये कैसी मनमानी। इंसानो की ये बात पुरानी है।। एक भूके को ना देकर रोटी।देते मंदिरों बलिदानी है।। ""है इंसान ये कैसी तेरी कैसी इंसानी है"" होगा तेरा खुदा तेरा ईश्वर बहुत खुश तुझ पर।ये बन्दे ये भक्त ये तेरी कैसी ना समझी है।। ""है इंसान ये कैसी तेरी नदानी है"" शिवलिंग पर तू रोज दूध चढ़ता है।कहीं कभी क्या प्यासे को पियाला पानी है।। बाते करते हैं लोग दूसरों की जाती धर्म की। अपना धर्म भूल चूंके है।। मज़ाक उड़ता है दूसरों की धर्म की। अपने धर्म की तू वाह वाह करता है।। अपने धर्म को तू भूल चूका है। इंसानियत से मुँह मोड़ चुका है।। अपने कर्तव्य को छोड़कर। दूसरे धर्म की करता हानी है।। दूसरे देश मैं कीचड़ उछाल कर। तू अपने देश का क्या मान बचाएगा।। ""अपने कर्तव्य को छोड़कर करता तू हानी है"" ये कैसी तेरी नदानी है। करता तू अपनी मनमानी है।। महल मैं सोने वाले तुझे भी चैन की नींद कहा आएगी। देख बहार तेरे घर के सामने कोई भूका सोया है।...

आज एक बात लिखता हूँ

आज एक प्यार की सौगात लिखता हूँ। आज मैं अपने दिल एक की बात लिखता हूँ।। तेरी मोहब्बत हो जाये तुझ पर कुर्बान। खुदा से गुजारिश एक पैगाम लिखता हूँ।। मिल जाए किसी के दिल मैं तुझे पन्नहा । बस तेरे लिए अपने दिल के जज्बात लिखता हूँ।। मेरी दोस्ती हो जाए तुझ पर पन्नहा। आज मैं अपने दिल की एक बात लिखता हूँ।। मिले या ना मिले किसी मोड़ पर हम तुम। रहे दोस्ती हमारी सलामत मैं ये फ़रियाद लिखता हूँ।। एक पहेली है ये ज़िन्दगी। फिर भी अपनी दिल की हर बात लिखता हूँ।। आज एक प्यार की सौगात लिखता हूँ। आज मैं अपनी दिल की एक बात लिखता हूँ।। रहे तू जहाँ भी रहे इस दुनिया मैं। बस एक बार तुझे मिलने की फ़रियाद लिखता हूँ।। """आज मैं अपनी दिल की बात लिखता हूँ"" Written by- मनोज कुमाउनी

हे ईश्वर

मेरे जीवन से जुडी सत्य पंक्तियाँ ~~~~~~~~~~~~~~~ ~~~~~~~~~~~~~~~~ जीवन मैं न जाने कितने उत्तार आये ना जाने कितने चढ़ाओ आए। फिर भी मेरे कदम एक पल भी ना डगमगाए।। साथ रहे या ना रहे किसी का इस जगत मैं... ~~~~~~~~~~~~~~~~ """"""""""""हे प्रभु""""""""""" ~~~~~~~~~~~~~~~~~ बस एक तेरा साथ रहे जाए। ~~~~~~~~~~~~~~ ~~~~~~~~~~~~~~ """""""मनोज कुमाउनी"""""""""

इंसान

एक दिन निकले सेर पर। दिल मैं कुछ अरमान थे।। एक तरफ थी झोपड़ियां। दूसरे तरफ मकान थे।। चलते-चलते रास्ते मैं एक हड्डी आई। उसके भी ये ब्यान थे।। ये चलने वाले जरा संभल कर चलना। हम भी कभी इंसान थे।। पोस्ट-मनोज कुमाउनी