इंसान

एक दिन निकले सेर पर।
दिल मैं कुछ अरमान थे।।
एक तरफ थी झोपड़ियां।
दूसरे तरफ मकान थे।।
चलते-चलते रास्ते मैं एक हड्डी आई।
उसके भी ये ब्यान थे।।
ये चलने वाले जरा संभल कर चलना।
हम भी कभी इंसान थे।।
पोस्ट-मनोज कुमाउनी

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