""प्रकृति से हो रही छेड़खानी पर ये कविता""
""प्रकृति से हो रही छेड़खानी पर ये कविता""
आज ये कविता लिख कर। दिल मेरा रो पड़ा है।।
हो रही ये कैसी मनमानी। इंसानो की ये बात पुरानी है।।
एक भूके को ना देकर रोटी।देते मंदिरों बलिदानी है।।
""है इंसान ये कैसी तेरी कैसी इंसानी है""
होगा तेरा खुदा तेरा ईश्वर बहुत खुश तुझ पर।ये बन्दे ये भक्त ये तेरी कैसी ना समझी है।।
""है इंसान ये कैसी तेरी नदानी है""
शिवलिंग पर तू रोज दूध चढ़ता है।कहीं कभी क्या प्यासे को पियाला पानी है।।
बाते करते हैं लोग दूसरों की जाती धर्म की। अपना धर्म भूल चूंके है।।
मज़ाक उड़ता है दूसरों की धर्म की। अपने धर्म की तू वाह वाह करता है।।
अपने धर्म को तू भूल चूका है। इंसानियत से मुँह मोड़ चुका है।।
अपने कर्तव्य को छोड़कर। दूसरे धर्म की करता हानी है।।
दूसरे देश मैं कीचड़ उछाल कर। तू अपने देश का क्या मान बचाएगा।।
""अपने कर्तव्य को छोड़कर करता तू हानी है""
ये कैसी तेरी नदानी है। करता तू अपनी मनमानी है।।
महल मैं सोने वाले तुझे भी चैन की नींद कहा आएगी। देख बहार तेरे घर के सामने कोई भूका सोया है।।
""है इंसान तेरी ये कैसी इंसानी है""
करता है प्रकृति से छेड़ खानी। पहले ये जान ले किसने इसे संजोया है।।
बनाया है ईश्वर ने इस संसार को । कुदरत ने अपने रंगों से भरा है।।
इंसान करता अपनी मनमानी है।ईश्वर कहता तेरी ये नादानी है।।
लाये हो सोशल मीडिया पर परम परमेशर भगवान् को।लाइक करोगे तो बिगड़े बनेगे काम।।
"अगर नहीं किया तो बिगड़ेंगे काम"ऐसे पोस्ट को देखकर कर।
दिल मेरा मेरा रोता है।। बार बार ये कहता है। खूब किया अपने ईश्वर का अपमान।।
""अब तो सुधर जा है इंसान""
तू दूसरे उसके धर्म की बात करता है।
अपना धर्म तू भूल चुका है।।
""वाह रे इंसान ये तेरी कैसी नदानी है""
""माफ़ी चाहता हूँ बैज्ञनिको से ये लाइन भी लिखना जरुरी है""
दिया है जब जब चेतावनी वैज्ञानिकों ने।
जब जब तू संभला है।।
दिखया जब जब कुदरत ने अपना कहर।
फिर भी तू ना संभला है।।
""है इंसान तेरी ये कैसी नदानी है""
""मेरे आँखों मैं आता पानी है""
आज ये कविता लिख कर। मेरा दिल रो पड़ा है।।
अपने कर्तव्य धर्म से है इंसान।अपना मुँह मोड़ चुका है।।
फिर भी करता इंसान अपनी मनमानी है।ईश्वर कहता है इंसान ये तेरी नदानी है।।
आज कलम भी लिखता है।एसा लिख कर दिल मेरा रोता है।।
"""करता इंसान अपनी अपनी मनमानी है""
नोट- किसी भी धर्मस्थल का मज़ाक ना उड़ाए
एक ही बात-""हम सब एक हैं।सबका मालिक एक है।।
""""मनोज कुमाउनी""""
आज ये कविता लिख कर। दिल मेरा रो पड़ा है।।
हो रही ये कैसी मनमानी। इंसानो की ये बात पुरानी है।।
एक भूके को ना देकर रोटी।देते मंदिरों बलिदानी है।।
""है इंसान ये कैसी तेरी कैसी इंसानी है""
होगा तेरा खुदा तेरा ईश्वर बहुत खुश तुझ पर।ये बन्दे ये भक्त ये तेरी कैसी ना समझी है।।
""है इंसान ये कैसी तेरी नदानी है""
शिवलिंग पर तू रोज दूध चढ़ता है।कहीं कभी क्या प्यासे को पियाला पानी है।।
बाते करते हैं लोग दूसरों की जाती धर्म की। अपना धर्म भूल चूंके है।।
मज़ाक उड़ता है दूसरों की धर्म की। अपने धर्म की तू वाह वाह करता है।।
अपने धर्म को तू भूल चूका है। इंसानियत से मुँह मोड़ चुका है।।
अपने कर्तव्य को छोड़कर। दूसरे धर्म की करता हानी है।।
दूसरे देश मैं कीचड़ उछाल कर। तू अपने देश का क्या मान बचाएगा।।
""अपने कर्तव्य को छोड़कर करता तू हानी है""
ये कैसी तेरी नदानी है। करता तू अपनी मनमानी है।।
महल मैं सोने वाले तुझे भी चैन की नींद कहा आएगी। देख बहार तेरे घर के सामने कोई भूका सोया है।।
""है इंसान तेरी ये कैसी इंसानी है""
करता है प्रकृति से छेड़ खानी। पहले ये जान ले किसने इसे संजोया है।।
बनाया है ईश्वर ने इस संसार को । कुदरत ने अपने रंगों से भरा है।।
इंसान करता अपनी मनमानी है।ईश्वर कहता तेरी ये नादानी है।।
लाये हो सोशल मीडिया पर परम परमेशर भगवान् को।लाइक करोगे तो बिगड़े बनेगे काम।।
"अगर नहीं किया तो बिगड़ेंगे काम"ऐसे पोस्ट को देखकर कर।
दिल मेरा मेरा रोता है।। बार बार ये कहता है। खूब किया अपने ईश्वर का अपमान।।
""अब तो सुधर जा है इंसान""
तू दूसरे उसके धर्म की बात करता है।
अपना धर्म तू भूल चुका है।।
""वाह रे इंसान ये तेरी कैसी नदानी है""
""माफ़ी चाहता हूँ बैज्ञनिको से ये लाइन भी लिखना जरुरी है""
दिया है जब जब चेतावनी वैज्ञानिकों ने।
जब जब तू संभला है।।
दिखया जब जब कुदरत ने अपना कहर।
फिर भी तू ना संभला है।।
""है इंसान तेरी ये कैसी नदानी है""
""मेरे आँखों मैं आता पानी है""
आज ये कविता लिख कर। मेरा दिल रो पड़ा है।।
अपने कर्तव्य धर्म से है इंसान।अपना मुँह मोड़ चुका है।।
फिर भी करता इंसान अपनी मनमानी है।ईश्वर कहता है इंसान ये तेरी नदानी है।।
आज कलम भी लिखता है।एसा लिख कर दिल मेरा रोता है।।
"""करता इंसान अपनी अपनी मनमानी है""
नोट- किसी भी धर्मस्थल का मज़ाक ना उड़ाए
एक ही बात-""हम सब एक हैं।सबका मालिक एक है।।
""""मनोज कुमाउनी""""
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